वैदिक पंचांग (Vaidik Panchang)
दिनांक – 25 मार्च 2025
दिन – मंगलवार
विक्रम संवत् – 2081
अयन – उत्तरायण
ऋतु – बसन्त
मास – चैत्र
पक्ष – कृष्ण
तिथि – एकादशी प्रातः 03:45 मार्च 26 तक तत्पश्चात् द्वादशी
नक्षत्र – श्रवण प्रातः 03:49 मार्च 26 तक तत्पश्चात् घनिष्ठा
योग – शिव दोपहर 02:53 तक तत्पश्चात् सिद्ध
राहुकाल- दोपहर 03:49 से शाम 05:21 तक (अहमदाबाद मानक समयानुसार)
सूर्योदय – 06:39
सूर्यास्त – 06:53 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त अहमदाबाद मानक समयानुसार)
दिशा शूल – उत्तर दिशा में
ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 05:05 से प्रातः 05:52 तक (अहमदाबाद मानक समयानुसार)
अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 12:21 से दोपहर 01:10 तक
निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:22 मार्च 26 से रात्रि 01:09 मार्च 26 तक (अहमदाबाद मानक समयानुसार)
व्रत पर्व विवरण – पापमोचनी एकादशी
25 मार्च को चावल न खायें एवं व्रत उपवास 26 मार्च ।
विशेष – एकादशी को शिम्बी (सेम) खाने से पुत्र का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)
पापमोचनी एकादशी व्रत
{ आज 25 मार्च 2025,मंगलवार }
पापमोचनी एकादशी चैत्र मास { गुजरात एवं महाराष्ट्र के अनुसार फाल्गुन } के कृष्ण पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है‘ पापमोचनी’ यानी “पाप” का अर्थ है ‘अधर्म या बुरे कार्य’ ..और “मोचनी” का अर्थ है ‘मुक्ति या हरने वाली’
यानी कि “पाप” का जो ‘हरण करें मुक्ति दिलाये’ उसे “पापमोचनी एकादशी” कहते हैं
पापमोचनी एकादशी पापों को नष्ट करने वाली एकादशी है। यह व्रत व्यक्ति को उसके सभी पापों से मुक्त कर उसके लिये मोक्ष का मार्ग दिखाता है। इस एकादशी के दिन भगवान विष्णु जी का पूजन करने से अतिशुभ फलों की प्राप्ति होती है
एकादशी व्रत कथा
महाराज युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से चैत्र (गुजरात महाराष्ट्र के अनुसार फाल्गुन ) मास के कृष्णपक्ष की एकादशी के बारे में जानने की इच्छा प्रकट की तो प्रभु श्री कृष्ण बोले: ‘राजेन्द्र ! मैं तुम्हें इस विषय में एक पापनाशक उपाख्यान सुनाऊँगा, जिसे चक्रवर्ती नरेश मान्धाता के पूछने पर महर्षि लोमश ने कहा था ।’
मान्धाता ने पूछा : भगवन् ! मैं लोगों के हित की इच्छा से यह सुनना चाहता हूँ कि चैत्र मास के कृष्णपक्ष में किस नाम की
एकादशी होती है, उसकी क्या विधि है
तथा उससे किस फल की प्राप्ति होती है
कृपया ये सब बातें मुझे बताइये
लोमशजी ने कहा : नृपश्रेष्ठ ! पूर्वकाल की बात है । अप्सराओं से सेवित चैत्ररथ नामक वन में, जहाँ गन्धर्वों की कन्याएँ अपने किंकरो के साथ बाजे बजाती हुई विहार करती हैं, मंजुघोषा नामक अप्सरा मुनिवर मेघावी को मोहित करने के लिए गयी । वे महर्षि चैत्ररथ वन में रहकर ब्रह्मचर्य का पालन करते थे । मंजुघोषा मुनि के भय से आश्रम से एक कोस दूर ही ठहर गयी और सुन्दर ढंग से वीणा बजाती हुई मधुर गीत गाने लगी । मुनिश्रेष्ठ मेघावी घूमते हुए उधर जा निकले और उस सुन्दर अप्सरा को इस प्रकार गान करते देख बरबस ही मोह के वशीभूत हो गये । मुनि की ऐसी अवस्था देख मंजुघोषा उनके समीप आयी और वीणा नीचे रखकर उनका आलिंगन करने लगी । मेघावी भी उसके साथ रमण करने लगे । रात और दिन का भी उन्हें भान न रहा । इस प्रकार उन्हें बहुत दिन व्यतीत हो गये । मंजुघोषा देवलोक में जाने को तैयार हुई । जाते समय उसने मुनिश्रेष्ठ मेघावी से कहा: ‘ब्रह्मन् ! अब मुझे अपने देश जाने की आज्ञा दीजिये ।’
मेघावी बोले : देवी ! जब तक सवेरे की संध्या न हो जाय तब तक मेरे ही पास ठहरो ।
अप्सरा ने कहा : विप्रवर ! अब तक न जाने कितनी ही संध्याँए चली गयीं ! मुझ पर कृपा करके बीते हुए समय का विचार तो कीजिये !
लोमशजी ने कहा : राजन् ! अप्सरा की बात सुनकर मेघावी चकित हो उठे । उस समय उन्होंने बीते हुए समय का हिसाब लगाया तो मालूम हुआ कि उसके साथ रहते हुए उन्हें सत्तावन वर्ष हो गये । उसे अपनी तपस्या का विनाश करनेवाली जानकर मुनि को उस पर बड़ा क्रोध आया । उन्होंने शाप देते हुए कहा: ‘पापिनी ! तू पिशाची हो जा ।’ मुनि के शाप से दग्ध होकर वह विनय से नतमस्तक हो बोली : ‘विप्रवर ! मेरे शाप का उद्धार कीजिये । सात वाक्य बोलने या सात पद साथ साथ चलनेमात्र से ही सत्पुरुषों के साथ मैत्री हो जाती है । ब्रह्मन् ! मैं तो आपके साथ अनेक वर्ष व्यतीत किये हैं, अत: स्वामिन् ! मुझ पर कृपा कीजिये
’
मुनि बोले : भद्रे ! क्या करुँ
तुमने मेरी बहुत बड़ी तपस्या नष्ट कर डाली है । फिर भी सुनो । चैत्र कृष्णपक्ष में जो एकादशी आती है उसका नाम है ‘पापमोचनी ।’ वह शाप से उद्धार करनेवाली तथा सब पापों का क्षय करनेवाली है । सुन्दरी ! उसीका व्रत करने पर तुम्हारी पिशाचता दूर होगी ।
ऐसा कहकर मेघावी अपने पिता मुनिवर च्यवन के आश्रम पर गये । उन्हें आया देख च्यवन ने पूछा : ‘बेटा ! यह क्या किया
तुमने तो अपने पुण्य का नाश कर डाला !’
मेघावी बोले : पिताजी ! मैंने अप्सरा के साथ रमण करने का पातक किया है । अब आप ही कोई ऐसा प्रायश्चित बताइये, जिससे पातक का नाश हो जाय ।
च्यवन ने कहा : बेटा ! चैत्र कृष्णपक्ष में जो ‘पापमोचनी एकादशी’ आती है, उसका व्रत करने पर पापराशि का विनाश हो जायेगा ।
पिता का यह कथन सुनकर मेघावी ने उस व्रत का अनुष्ठान किया । इससे उनका पाप नष्ट हो गया और वे पुन: तपस्या से परिपूर्ण हो गये । इसी प्रकार मंजुघोषा ने भी इस उत्तम व्रत का पालन किया । ‘पापमोचनी’ का व्रत करने के कारण वह पिशाचयोनि से मुक्त हुई और दिव्य रुपधारिणी श्रेष्ठ अप्सरा होकर स्वर्गलोक में चली गयी ।
भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं : राजन् ! जो श्रेष्ठ मनुष्य ‘पापमोचनी एकादशी’ का व्रत करते हैं उनके सारे पाप नष्ट हो जाते हैं । इसको पढ़ने और सुनने से सहस्र गौदान का फल मिलता है । ब्रह्महत्या, सुवर्ण की चोरी, सुरापान और गुरुपत्नीगमन करनेवाले महापातकी भी इस व्रत को करने से पापमुक्त हो जाते हैं । यह व्रत बहुत पुण्यमय है ।
एक अन्य कथा
पापमोचनी का एक दूसरा छोटा सा प्रसंग भी आता है एक बार सभी पाप एकादशी व्रत के कारण अग्नि से जलने लगे और प्रभु श्री नारायण के पास गए और प्रभु श्री नारायण से कहने लगे हे प्रभु आपके भक्तगण एकादशी का व्रत करने से हम अग्नि से जलने लगे हैं हमसे यह ताप सहा नहीं जाता है
हे प्रभु आप ही ने हमें बनाया हुआ है
तो अब हम कहां जाए
तब प्रभु श्री नारायण उन सभी पापों से कहने लगे की आप एकादशी के दिन अन्न में जाकर छुप जाइए जिससे आपकी रक्षा होगी ! तब से लेकर आज तक इसीलिए एकादशी के दिन अन्न को ग्रहण नहीं किया जाता क्योंकि अन्न में एकादशी के दिन सभी पापों का वास होता है
श्री पद्मपुराण के अनुसार
एकादशी के दिन यदि एक ही आँवला मिल जाये तो उसके सामने गंगा, गया, काशी और पुष्कर आदि तीर्थ कोई विशेष महत्व नहीं रखते
एकादशी के दिन आंवले के रस से स्नान जरूर करें
{ नहाने की पानी की बाल्टी में कुछ बुंदे आंवले के रस की मिला दे } एवं प्रभु श्री हरि विष्णु को आंवला अर्पित करें
{ आंवले के रस की बोतल पतंजलि आयुर्वेदिक स्टोर पर या अन्य आयुर्वेदिक स्टोर पर आपको मिल जाएगी }
विशेष
एकादशी के पूरे दिन एवं रात्रि मे जागरण के लिए जहां तक संभव हो वहां तक टीवी चैनल पर प्रसारित होने वाली सभी धार्मिक- आध्यात्मिक चैनल जैसे कि आस्था टीवी चैनल ,आस्था भजन चैनल, आस्था गुजराती चैनल,संस्कार चैनल, सत्संग चैनल ,शुभ चैनल, धर्म संदेश {अरिहंत} चैनल ,साधना चैनल, संतवाणी चैनल, ईश्वर चैनल, दिशा चैनल ,श्रद्धा चैनल , वैदिक चैनल, दिव्य चैनल, सुभारती चैनल विगेरे…विगेरे… विविध प्रकार की सभी स्वदेशी चैनल ……….जो कि पूरे दिन और रात्रि में यानी कि 24 घंटे आरती,भजन- कीर्तन, श्री हनुमानचालीसा ,श्री सुंदरकांड ,श्रीमद् भागवत कथा , श्री शिव महापुराण कथा, श्री राम कथा, श्री देवी भागवत कथा,श्री गीता ज्ञान, श्री भक्त माल कथा जो कि कई सालों से निरंतर प्रसारित करती है …..हम यही सभी धार्मिक चैनलों के साथ जुड़कर रात्रि जागरण के लिए …या फिर अपने समय के अनुकूल कभी भी सभी धार्मिक चैनलों के साथ जुड़ के भक्ति में लीन हो सकते हैं
मेरा निवेदन रहेगा
कि सभी सनातन प्रेमी हमारी स्वदेशी धार्मिक चैनलों का उपयोग अवश्य करें और भावभक्ति में लीन हो जाए और बाकी लोगों को भी ज्यादा से ज्यादा जोड़ें
एकादशी मंत्र
| राम रामेति रामेति |
| रमे रामे मनोरमे |
| सहस्त्रनाम ततुल्यं |
| राम नाम वरानने |
एकादशी के दिन इस मंत्र का जप करने से श्री विष्णु सहस्त्रनाम जप के समान पुण्य फल प्राप्त होता है
श्री हरि शरणम
पापमोचनी,कामदा, वरुथिनी,मोहिनी,अपरा, निर्जला, योगिनी, देवशयनी, कामिका, पवित्रा, अजा,परिवर्तिनी, इंदिरा, पापांकुशा, रमा,देव प्रबोधिनी, उत्पत्ति,मोक्षदा, सफला, पुत्रदा, षटतिला, जया, विजया, आमलकी,
अधिक मास की अन्य 2
कमला {पद्मिनी}, परमा,
एकादशी के इन 26 नामों के स्मरण से भी सभी एकादशियो के व्रत करने का पुण्य प्राप्त होता हैं
कलयुग केवल नाम अधारा सुमिर सुमिर नर उतरहि पारा
{कलयुग में केवल नाम मात्र से ही भवसागर को पार किया जा सकता है यह कलयुग की बहुत बड़ी विशेषता है}
नामसंकीर्तन यस्य सर्वपापप्रणाशनम्।
प्रणामो दुःखशमनस्तं नमामि हरिं परम्
मंत्र :- एकादशी के दिन इनमें
से किसी भी मंत्र का 108 बार जाप अवश्य करना चाहिए।
1} ॐ विष्णवे नम:
2} ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
3} श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारी। हे नाथ नारायण वासुदेवाय
4} ॐ नारायणाय विद्महे। वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णु प्रचोदयात्
5} ॐ नमो नारायण। श्री मन नारायण नारायण हरि हरि
6} “हरे राम हरे राम, राम राम हरे हर”
“हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे”
ओम नमो नारायणाय
।। आञ्जनेय हनुमान ।।
हनुमानजी का जन्म त्रेतायुग मे अंजना के पुत्र के रूप में चैत्र शुक्ल की पूर्णिमा की महानिशा में हुआ। अंजना के पुत्र होने के कारण ही हनुमानजी को आञ्जनेय नाम से भी जाना जाता है जिसका अर्थ होता है ‘अंजना द्वारा उत्पन्न’। उनका एक नाम पवनपुत्र भी है जिसका शास्त्रों में सबसे ज्यादा उल्लेख मिलता है। शास्त्रों में हनुमानजी को वातात्मज भी कहा गया है, वातात्मज यानी जो वायु से उत्पन्न हुआ हो।
पुराणों में कथा है कि केसरी और अंजना के विवाह के बाद वह संतान सुख से वंचित थे। अंजना अपनी इस पीड़ा को लेकर मतंग ऋषि के पास गईं, तब मंतग ऋषि ने उनसे कहा- पप्पा (कई लोग इसे पंपा सरोवर भी कहते हैं) सरोवर के पूर्व में नरसिंह आश्रम है, उसकी दक्षिण दिशा में नारायण पर्वत पर स्वामी तीर्थ है वहां जाकर उसमें स्नान करके, बारह वर्ष तक तप और उपवास करने पर तुम्हें पुत्र सुख की प्राप्ति होगी।
अंजना ने मतंग ऋषि और अपने पति केसरी से आज्ञा लेकर तप किया और बारह वर्ष तक केवल वायु पर ही जीवित रहीं। एक बार अंजना ने ‘शुचिस्नान’ करके सुंदर वस्त्राभूषण धारण किए, तब वायु देवता ने अंजना की तपस्या से प्रसन्न होकर उनके कर्णरन्ध्र में प्रवेश कर उसे वरदान दिया कि तेरे यहां सूर्य, अग्नि और सुवर्ण के समान तेजस्वी, वेद-वेदांगों का मर्मज्ञ, विश्वन्द्य महाबली पुत्र होगा।
दूसरी कथा के अनुसार-
अंजना ने मतंग ऋषि एवं अपने पति केसरी से आज्ञा लेकर नारायण पर्वत पर स्वामी तीर्थ के पास अपने आराध्य शिवजी की तपस्या शुरू की। तपस्या से प्रसन्न होकर शिवजी ने उन्हें वरदान मांगने को कहा, अंजना ने कहा कि साधु के श्राप से मुक्ति पाने के लिए उन्हें शिव के अवतार को जन्म देना है इसलिए शिव बालक के रूप में उनकी कोख से जन्म लें। ‘तथास्तु’ कहकर शिव अंतर्ध्यान हो गए।
इस घटना के बाद एक दिन अंजना शिव की आराधना कर रही थीं और दूसरी तरफ अयोध्या में, इक्ष्वाकु वंशी महाराज अज के पुत्र और अयोध्या के महाराज दशरथ, अपनी तीन रानियों के कौशल्या, सुमित्रा और कैकेयी साथ पुत्र रत्न की प्राप्ति के लिए, श्रृंगी ऋषि को बुलाकर ‘पुत्र कामेष्टि यज्ञ’ के साथ यज्ञ कर रहे थे। यज्ञ की पूर्णाहुति पर स्वयं अग्निदेव ने प्रकट होकर श्रृंगी को खीर का एक स्वर्ण पात्र (कटोरी) दिया और कहा ‘ऋषिवर! यह खीर राजा की तीनों रानियों को खिला दो।
राजा की इच्छा अवश्य पूर्ण होगी। ‘जिसे तीनों रानियों को खिलाना था लेकिन इस दौरान एक चमत्कारिक घटना हुई, एक पक्षी उस खीर की कटोरी में थोड़ा सा खीर अपने पंजों में फंसाकर ले गया और तपस्या में लीन अंजना के हाथ में गिरा दिया। अंजना ने शिव का प्रसाद समझकर उसे ग्रहण कर लिया और इस प्रकार हनुमानजी का जन्म हुआ। शिव भगवान का अवतार कहे जाने वाले हनुमानजी को मारूति के नाम से भी जाना जाता है।
गृह के समीपस्थ वृक्ष
ईशान में आँवला शुभदायक है ।
ईशान – पूर्व में कटहल एवं आम शुभदायक हैं ।
(३) घरके पास काँटेवाले, दूधवाले तथा फलवाले वृक्ष स्त्री और सन्तान की हानि करनेवाले हैं । यदि इन्हें काटा न जा सके तो इनके पास शुभ वृक्ष लगा दें ।
काँटेवाले वृक्ष शत्रु से भय देनेवाले, दूधवाले वृक्ष धनका नाश करनेवाले और फलवाले वृक्ष सन्तानका नाश करनेवाले हैं । इनकी लकड़ी भी घरमें नहीं लगानी चाहिये-
आसन्नाः कण्टकिनो रिपुभयदाः क्षीरिणोऽर्थनाशाय ।
फलिनः प्रजाक्षयकरा दारूण्यपि वर्जयेदेषाम् ॥
(बृहत्संहिता ५३। ८६)
(४) बदरी कदली चैव दाडिमी बीजपूरिका।
प्ररोहन्ति गृहे यत्र तद्गृहं न प्ररोहति ॥
(समरांगणसूत्रधार ३८ । १३१) ‘बेर, केला, अनार तथा नींबू जिस घरमें उगते हैं, उस घर की वृद्धि नहीं होती । ‘
अश्वत्थं च कदम्बं च कदलीबीजपूरकम् । गृहे यस्य प्ररोहन्ति स गृही न प्ररोहति ॥
(बृहद्दैवज्ञ० ८७ ९) ‘पीपल, कदम्ब, केला, बीजू नींबू ये जिस घरमें होते हैं, उसमें रहनेवाले की वंशवृद्धि नहीं होती ।’
(५) घर के भीतर लगायी हुई तुलसी मनुष्यों के लिये कल्याणकारिणी, धन-पुत्र प्रदान करनेवाली, पुण्यदायिनी तथा हरिभक्ति देनेवाली होती है । प्रातःकाल तुलसीका दर्शन करनेसे सुवर्ण दानका फल प्राप्त होता है ।
जिनका आज जन्मदिन है उनको हार्दिक शुभकामनाएं बधाई और शुभ आशीष
दिनांक 25 को जन्मे व्यक्ति का मूलांक 7 होगा। यह अंक वरूण ग्रह से संचालित होता है। इस अंक से प्रभावित व्यक्ति अपने आप में कई विशेषता लिए होते हैं। आप खुले दिल के व्यक्ति हैं। आप पैनी नजर के होते हैं। किसी के मन की बात तुरंत समझने की आपमें दक्षता होती है। आपकी प्रवृत्ति जल की तरह होती है। जिस तरह जल अपनी राह स्वयं बना लेता है वैसे ही आप भी तमाम बाधाओं को पार कर अपनी मंजिल पाने में कामयाब होते हैं।
शुभ दिनांक : 7, 16, 25
शुभ अंक : 7, 16, 25, 34
शुभ वर्ष : 2026
ईष्टदेव : भगवान शिव तथा विष्णु
शुभ रंग : सफेद, पिंक, जामुनी, मेहरून
जन्मतिथि के अनुसार भविष्यफल :
नौकरीपेशा व्यक्तियों के लिए समय सुखकर रहेगा। नवीन कार्य-योजना शुरू करने से पहले केसर का लंबा तिलक लगाएं। आपके कार्य में तेजी का वातावरण रहेगा। आपको प्रत्येक कार्य में जुटकर ही सफलता मिलेगी। व्यापार-व्यवसाय की स्थिति उत्तम रहेगी। अधिकारी वर्ग का सहयोग मिलेगा। मंदिर में पताका चढ़ाएं।
आज का राशिफल
मेष (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)
आज का दिन आपके लिए लाभदायक रहने वाला है। जीवनसाथी को आप किसी नए बिजनेस की शुरुआत कर सकते हैं। आपके परिवार के किसी सदस्य के स्वास्थ्य में अकस्मात गिरावट आने से आपकी भागदौड़ लगी रहेगी। आपको अपने आर्थिक प्रयासों में तेजी लानी होगी। आप किसी पूजा-पाठ आदि का अपने घर में आयोजन कर सकते हैं। आप किसी की कहीसुनी बातों पर भरोसा बिल्कुल ना करें। राजनीति की ओर कदम बढ़ा रहे लोगों को कुछ मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा।
वृष (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)
आज का दिन आपके लिए पारिवारिक रिश्तों में मजबूती लेकर आएगा। आपकी आय के सोर्स बढ़ेंगे। आप अपनी जरूरत की आवश्यकताओं की पूर्ति आसानी से कर सकेंगे, लेकिन आप पारिवारिक कामों को कल पर न टालें। आपके घर के किसी सदस्य को आज सम्मान की प्राप्ति हो सकती हैं। सरकारी नौकरी में कार्यरत लोगों को प्रमोशन मिलेगा। विद्यार्थियों के उच्च शिक्षा के मार्ग प्रशस्त होंगे। घूमने-फिरने के दौरान आपको कोई महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होगी।
मिथुन (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, हा)
आज का दिन नौकरीपेशा जातकों के लिए अच्छा रहने वाला है। आपको आज कुछ कर्ज उतारने में कठिनाइयां आएंगी। आपकी सेहत में उतार-चढ़ाव रहने से आपका मन परेशान रहेगा। सामाजिक कार्यक्रमों में आप बढ़ चढ़कर हिस्सा लेंगे। गृहस्थ जीवन जी रहे लोगों की अपने साथी से खटपट होने की संभावना है। आप किसी से मांगकर वाहन ना चलाएं, नहीं तो कोई दुर्घटना होने की संभावना है। भाईचारे की भावना आपके मन में रहेगी। आपको किसी नए काम में सोच समझकर हाथ बढ़ाना होगा।
कर्क (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)
आज का दिन आपके लिए सकारात्मक परिणाम लेकर आएगा। आप अपने कामों में कुछ बदलाव करेंगे, तो आपके लिए अच्छा रहने वाला है। आप किसी नई संपत्ति भूमि-वाहन आदि की खरीदारी करने की प्लानिंग कर सकते हैं। आपके घर किसी अतिथि का आगमन हो सकता है। आपको अपने भाइयों से संपत्ति को लेकर लड़ाई-झगड़ा होने की संभावना है। आपके घर किसी मांगलिक कार्यक्रम की तैयारी शुरू हो सकती हैं। आपको किसी से कोई वादा सोच समझकर करना होगा।
सिंह (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)
आज के दिन आपके लिए अपने आसपास रह रहे विरोधियों से सावधान रहने के लिए रहेगा। आपको अनजान लोगों से दूरी बनाकर रखनी होगी। आपके बिजनेस में आपको कोई सरकारी टेंडर मिल सकता है। आप कुछ नई योजनाओं को शामिल करेंगे। आपकी कोई मन की इच्छा पूरी होने से खुशी का ठिकाना नहीं रहेगा। वरिष्ठ सदस्यों का आपको पूरा सहयोग मिलेगा। आपको कोई निवेश बहुत ही सोच समझकर करना होगा।
कन्या (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)
आज का दिन आपके लिए उलझनों से भरा रहने वाला है। आपको एक साथ कई काम हाथ लगने से आपकी व्याकाग्रता बढ़ेगी। आपको मन में चल रही उलझनों पूरा ध्यान देना होगा। कोई पुराना लेनदेन चुकता होगा। आप किसी प्रतियोगिता में सोच समझकर हाथ बढ़ाएं। माता-पिता के आशीर्वाद से आपका कोई रुका हुआ काम पूरा होगा। आपकी आर्थिक स्थिति पहले से बेहतर रहेगी। आपको अचानक लाभ मिलने से खुशियां बढ़ेंगी।
तुला (रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)
आज का दिन आपके लिए अकस्मात लाभ दिलाने वाला रहेगा। दोस्तों के साथ आप कुछ समय मौज-मस्ती करने में व्यतीत करेंगे। आपको अपने बिजनेस में चल रही समस्याओं का समाधान ढूंढना होगा। भाई-बहनों से रिश्ते में यदि कुछ अनबन चल रही थी, तो वह भी दूर होगी। आप अपने घर के रिनोवेशन पर भी अच्छा खासा धन खर्च करेंगे। आपको कुछ ईर्ष्यालु और झगड़ालु लोगों से दूरी बनाकर रखना बेहतर रहेगा। आपकी सुविधाएं बढ़ेंगी, जो आपको खुशी देंगी।
वृश्चिक (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)
आज का दिन आपके लिए खुशनुमा रहने वाला है। आपको किसी दूर रह रहे परिजन से कोई खुशखबरी सुनने को मिल सकती है। पारिवारिक बिजनेस में कामों में आप कोई बदलाव करने के बारे में सोच विचारकर सकते हैं। आपको किसी दूर रहे परिजन की याद सता सकती है। आपका कोई नया शेयर मार्केट इन्वेस्टमेंट कर सकते हैं। आप किसी प्रॉपर्टी की डील को लेकर यदि परेशान थे, तो वह भी फाइनल होगी।
धनु (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे)
आज के दिन आपकी निर्णय लेने की क्षमता बेहतर रहेगी। आपको मित्रों और रिश्तेदारों का पूरा सहयोग मिलेगा। सामाजिक क्षेत्रों से जुड़कर आप अच्छा नाम कमाएंगे। आपको किसी पुराने मित्र से लंबे समय बाद मिलकर खुशी होगी। विद्यार्थियों को बौद्धिक व मानसिक बोझ से छुटकारा मिलेगा। आपको अपने माता-पिता की सेवा के लिए भी कुछ समय निकालना होगा। आप अपने कामों को किसी दूसरे पर ना छोड़े, तो उन्हें पूरा करने में समस्या आएगी।
मकर (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी)
आज का दिन आपके लिए इनकम के सोर्स को बढ़ाने वाला रहेगा। आपका कोई कानूनी मामला आपके लिए खुशियां लेकर आ सकता है। धर्म के कार्य में भी आप काफी ध्यान देंगे, जिससे आपके मन को सुकून मिलेगा। संतान किसी प्रतियोगिता में बेहतर प्रदर्शन करके आपको अच्छा लाभ देगी। आपको किसी सरकारी योजना का पूरा लाभ मिलेगा। जीवनसाथी को लेकर आप कहीं बाहर घूमाने-फिराने लेकर जा सकते हैं।
कुंभ (गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)
आज का दिन आपके लिए लंबे समय से रुके हुए कामों को पूरा करने के लिए रहेगा। आप किसी यात्रा पर जाएं, तो वाहनों का प्रयोग सावधान रहकर करें, जिससे रुके हुए धन की आपको प्राप्ति हो सकती है। यदि आपकी कोई प्रिय व मूल्यवान वस्तु खो गई थी, तो उसके आपको मिलने की पूरी संभावना है। भौतिक सुख-सुविधाओं में वृद्धि होगी। आप अपने खर्चो को लेकर थोड़ा सा सतर्क रहे। आपकी संतान आपकी उम्मीदों पर खरी उतरेगी।
मीन (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)
आज का दिन आपके लिए ठीक-ठाक रहने वाला है, लेकिन आप अपनी सेहत पर पूरा ध्यान दें। संतान के करियर को लेकर आपको थोड़ी टेंशन रहने वाली है, जिसके लिए आप उन्हें कुछ एग्जाम की तैयारी भी करवाएंगे। आप अपने वैवाहिक जीवन में नवीनता ला सके, तो आपके लिए बेहतर रहने वाला है। आप अच्छी सोच से कार्यक्षेत्र में किसी विपरीत परिस्थिति के बाद भी माहौल को सामान्य बनाने में कामयाब रहेंगे। आप परिवार के सदस्यों के साथ किसी मांगलिक कार्यक्रम में सम्मिलित होंगे।
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